
लेखक: Prolife Cancer Centre की मेडिकल टीम | चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. सुमित शाह, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, पुणे | अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026
संक्षेप में जानकारी
मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर) तब होता है जब होंठ, जीभ, गाल के अंदरूनी हिस्से, मसूड़ों, तालू या मुंह के फर्श की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह हेड एंड नेक कैंसर का एक प्रमुख प्रकार है। मुंह में ऐसा छाला या घाव जो 2 हफ्ते में ठीक न हो, सफेद या लाल धब्बा, या मुंह में गांठ हो तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। शुरुआती अवस्था में पकड़ में आने पर इसका इलाज कहीं ज्यादा सफल होता है।
भारत में मुंह का कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है, खासकर पुरुषों में। GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल इसके लगभग 1.4 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 80 हजार लोगों की मृत्यु होती है। इसका सबसे बड़ा कारण तंबाकू है, इसलिए यह काफी हद तक रोका जा सकने वाला कैंसर है।
मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण
मुंह के कैंसर के लक्षण अक्सर शुरू में दर्द रहित होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इन संकेतों पर ध्यान दें:
- मुंह, जीभ या गाल में ऐसा छाला या घाव जो 2 हफ्ते से ज्यादा समय में भी ठीक न हो
- मुंह या जीभ में सफेद धब्बा (ल्यूकोप्लाकिया) या लाल धब्बा (एरिथ्रोप्लाकिया)
- गाल, मसूड़े या गर्दन में गांठ या मोटापन
- मुंह से बार-बार बिना वजह खून आना
- मुंह पूरा न खुल पाना, या खाना चबाने और निगलने में तकलीफ
- दांत का बिना वजह हिलना, या दांत निकलवाने के बाद घाव का न भरना
- जीभ, होंठ या चेहरे के किसी हिस्से में सुन्नपन
- आवाज में बदलाव या गले में कुछ अटकने का एहसास (यह स्वर यंत्र (वॉइस बॉक्स) के कैंसर या गले के कैंसर का भी संकेत हो सकता है)
- एक कान में लगातार दर्द
- बिना कारण वजन घटना और सांस में लगातार बदबू
जरूरी बात: इनमें से कोई भी लक्षण कैंसर के अलावा दूसरी वजहों से भी हो सकता है, जैसे संक्रमण या दांत की समस्या। लेकिन जो लक्षण 2 हफ्ते से ज्यादा बना रहे, उसकी जांच टालनी नहीं चाहिए।
मुंह के कैंसर के कारण और जोखिम कारक
1. तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन
सिगरेट, बीड़ी, चिलम और हुक्का के साथ गुटखा, खैनी, मावा, जर्दा और तंबाकू वाला पान भी जोखिम बढ़ाते हैं। धुआं रहित तंबाकू को “सुरक्षित विकल्प” समझना गलत है। भारत में मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण यही है। धूम्रपान से होने वाले अन्य कैंसरों के बारे में जानने के लिए पढ़ें: सिगरेट पीने से कौन से अंग का कैंसर सबसे ज्यादा होता है।
2. सुपारी और पान मसाला
सुपारी चबाने की आदत ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिसमें मुंह धीरे-धीरे खुलना बंद हो जाता है। यह कैंसर-पूर्व अवस्था मानी जाती है।
3. शराब
शराब अकेले भी जोखिम बढ़ाती है। तंबाकू और शराब साथ लेने पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
4. ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)
खासकर HPV-16 संक्रमण का संबंध गले के पिछले हिस्से (ऑरोफरीनक्स) के कैंसर से है।
5. कैंसर-पूर्व घाव
ल्यूकोप्लाकिया, एरिथ्रोप्लाकिया और OSMF कुछ मामलों में समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। इसलिए इनकी नियमित निगरानी जरूरी है। नियमित जांच के बारे में विस्तार से जानने के लिए देखें ओरल कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग।
6. दांतों की समस्या
टूटा या नुकीला दांत या खराब फिटिंग वाली डेन्चर लंबे समय तक एक ही जगह रगड़ें तो घाव बार-बार बनता है। साथ में मुंह की खराब सफाई भी जोखिम बढ़ाती है।
7. पोषण की कमी और सूरज की रोशनी
फल और सब्जियों की कमी वाला आहार जोखिम बढ़ा सकता है। होंठ के कैंसर में धूप में लंबे समय तक काम करना भी एक कारण है।
8. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और पारिवारिक इतिहास
ये कारण कम आम हैं, लेकिन इनसे जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।
मुंह के कैंसर की जांच कैसे होती है
- शारीरिक जांच: डॉक्टर मुंह, जीभ, गले और गर्दन की लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) की जांच करते हैं।
- बायोप्सी: संदिग्ध हिस्से का छोटा टुकड़ा लेकर माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। कैंसर की पुष्टि का यही एकमात्र निश्चित तरीका है।
- इमेजिंग: कैंसर कितना फैला है, यह जानने के लिए CT स्कैन, MRI या PET-CT किया जा सकता है।
- एंडोस्कोपी: जरूरत पड़ने पर गले और आसपास के हिस्सों को देखने के लिए की जाती है।
मुंह के कैंसर के स्टेज
कैंसर का स्टेज ट्यूमर के आकार, लसीका ग्रंथियों में फैलाव और शरीर के दूसरे अंगों तक फैलने के आधार पर तय होता है।
- स्टेज 0 और 1: ट्यूमर छोटा होता है और केवल मुंह तक सीमित रहता है।
- स्टेज 2: ट्यूमर थोड़ा बड़ा होता है, लेकिन गर्दन की ग्रंथियों तक नहीं पहुंचा होता।
- स्टेज 3: ट्यूमर बड़ा हो सकता है या गर्दन की ग्रंथियों में फैलना शुरू हो चुका होता है।
- स्टेज 4: कैंसर आसपास के ऊतकों, हड्डी या दूर के अंगों तक फैल चुका होता है।
मुंह के कैंसर का इलाज
इलाज कैंसर की जगह, स्टेज और मरीज की सेहत पर निर्भर करता है। फैसला आमतौर पर सर्जन, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की टीम मिलकर लेती है। पुणे में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी के लिए देखें ओरल (मुंह) कैंसर का इलाज।
सर्जरी
शुरुआती अवस्था में ट्यूमर को आसपास के कुछ स्वस्थ ऊतक के साथ निकाल दिया जाता है। अगर कैंसर गर्दन की ग्रंथियों तक फैला हो या फैलने का खतरा हो, तो नेक डिसेक्शन भी किया जाता है। बड़ी सर्जरी के बाद चेहरे और मुंह के कार्य को बहाल करने के लिए रीकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) सर्जरी की जा सकती है, ताकि खाना, निगलना और बोलना जितना संभव हो सामान्य रहे। कुछ मामलों में उन्नत तकनीक से भी सर्जरी संभव है, जैसे रोबोटिक कैंसर सर्जरी। यह कैंसर की जगह और स्टेज के अनुसार सर्जन तय करते हैं।
रेडियोथेरेपी
उच्च ऊर्जा की किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। यह सर्जरी के बाद बची कोशिकाओं को खत्म करने के लिए दी जाती है, या कुछ मामलों में मुख्य इलाज के रूप में।
कीमोथेरेपी
कैंसर-रोधी दवाओं से इलाज किया जाता है। यह अक्सर रेडियोथेरेपी के साथ या एडवांस्ड स्टेज में दी जाती है।
टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी
कुछ एडवांस्ड या दोबारा लौटे कैंसर में डॉक्टर इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
शुरुआती स्टेज में पकड़ में आए मुंह के कैंसर के ठीक होने की संभावना काफी अच्छी होती है। वहीं देर से पता चलने पर इलाज जटिल हो जाता है और परिणाम कमजोर पड़ते हैं। इसीलिए जल्दी जांच सबसे अहम है।
मुंह के कैंसर से बचाव कैसे करें
- हर तरह के तंबाकू, गुटखा, खैनी, पान मसाला और सुपारी को पूरी तरह छोड़ें।
- शराब का सेवन बंद करें या बहुत सीमित रखें।
- फल, सब्जियां और साबुत अनाज वाला संतुलित आहार लें।
- हर 6 महीने में दांतों की जांच करवाएं, और टूटे या नुकीले दांत ठीक करवाएं।
- HPV टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
- होंठों को तेज धूप से बचाएं।
- महीने में एक बार आईने के सामने खुद मुंह की जांच करें: गाल, जीभ (ऊपर, नीचे और किनारे), तालू, मसूड़े और होंठ देखें, और गर्दन में गांठ टटोलें।
अन्य कैंसरों की रोकथाम और स्क्रीनिंग की जानकारी के लिए देखें हमारा प्रिवेंशन और स्क्रीनिंग सेक्शन।
डॉक्टर को कब दिखाएं
इन स्थितियों में देर न करें:
- कोई छाला या घाव 2 हफ्ते से ज्यादा चले
- सफेद या लाल धब्बा दिखे
- मुंह में या गर्दन में गांठ महसूस हो
- मुंह खोलने या निगलने में बढ़ती हुई तकलीफ हो
- आप तंबाकू या सुपारी का सेवन करते हैं और कोई भी लक्षण दिखे
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या मुंह का कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
शुरुआती स्टेज में पकड़ में आने पर सर्जरी और जरूरत हो तो रेडियोथेरेपी से ठीक होने की संभावना अच्छी होती है। स्टेज जितना आगे बढ़ता है, इलाज उतना जटिल होता जाता है।
2. मुंह का छाला कैंसर है या नहीं, कैसे पहचानें?
साधारण छाले आमतौर पर 7 से 14 दिन में ठीक हो जाते हैं। जो छाला 2 हफ्ते से ज्यादा न भरे, सख्त लगे या बार-बार खून आए, उसकी बायोप्सी जांच जरूर करवाएं। सिर्फ देखकर कैंसर की पहचान नहीं की जा सकती।
3. क्या बिना तंबाकू के भी मुंह का कैंसर हो सकता है?
हां, हालांकि मामले कम हैं। HPV संक्रमण, शराब, दांतों की लगातार चोट, कमजोर प्रतिरक्षा और आनुवंशिक कारण इसकी वजह हो सकते हैं।
4. मुंह के कैंसर में कौन सी सर्जरी होती है?
ट्यूमर का वाइड एक्सिजन, जरूरत के अनुसार गर्दन की ग्रंथियां निकालना (नेक डिसेक्शन), और कई बार पुनर्निर्माण सर्जरी की जाती है।
5. ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस क्या है?
यह सुपारी या गुटखा खाने से होने वाली स्थिति है, जिसमें मुंह के अंदर की परत सख्त हो जाती है और मुंह खुलना कम होता जाता है। इसमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित जांच जरूरी है।
6. मुंह के कैंसर की जांच कहां करवाएं?
किसी अनुभवी हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलें, जो जांच और बायोप्सी करके आगे का इलाज तय करेंगे। पुणे में आप Prolife Cancer Centre से संपर्क कर सकते हैं।
निष्कर्ष
मुंह का कैंसर तंबाकू और सुपारी की आदत छोड़ने से काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही, मुंह की नियमित जांच करते रहने से यह शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ सकता है, जब इलाज सबसे ज्यादा कारगर होता है। अगर आपको या आपके किसी अपने को ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो इंतजार न करें।
पुणे में मुंह के कैंसर का इलाज: डॉ. सुमित शाह, Prolife Cancer Centre, मार्केट यार्ड, पुणे से अपॉइंटमेंट के लिए संपर्क करें: +91-9607079019 / +91-9607079029
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

